पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने बनाई 'जननीति भारत पार्टी', बोलीं- 2027 का चुनाव लड़ेंगे

पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने बनाई 'जननीति भारत पार्टी', बोलीं- 2027 का चुनाव लड़ेंगे

उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित और तेजतर्रार पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपनी नई राजनीतिक पारी का औपचारिक ऐलान कर दिया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के बाद उन्होंने गुरुवार को सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर अपनी नई राजनीतिक पार्टी 'जननीति भारत' के गठन की घोषणा की। गंगा किनारे से जारी अपने भावुक संदेश में दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश के आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में पूरी मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी। उन्होंने पारंपरिक राजनीति और अपनी पार्टी के विजन में अंतर बताते हुए कहा कि मौजूदा राजनीति जनता पर राज करती है, लेकिन जननीति भारत में वास्तविक राज जनता का होगा। उनके इस कदम के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों, खासकर पूर्वांचल की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

'गंगा की हर बूंद बराबर है, हमारी पार्टी में हर व्यक्ति की सुनी जाएगी आवाज'

दिव्या मित्तल ने पार्टी का नाम 'जननीति भारत' रखने के पीछे का दर्शन समझाते हुए कहा कि आज देश और प्रदेश में राजनीतिक दलों की कोई कमी नहीं है, बल्कि वास्तविक कमी जनता की सुनवाई की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में केवल कुछ प्रभावशाली लोगों की बात सुनी जाती है, जबकि आम नागरिक की आवाज अनसुनी रह जाती है। गंगा नदी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गंगा में मिलने वाली हर बूंद बराबर होती है—कोई छोटी या बड़ी नहीं होती और रास्ता वे बूंदें मिलकर तय करती हैं—उसी प्रकार उनकी पार्टी में हर नागरिक एक बूंद के समान होगा और हर बूंद मिलकर जननीति की धारा बनेगी। उन्होंने कहा कि उनका मकसद सरकार को केवल पांच साल में एक दिन यानी वोटिंग के दिन नहीं, बल्कि हर दिन जनता के सुझावों और जरूरतों के हिसाब से चलाना है।

जननीति भारत पार्टी के तीन प्रमुख वचन: जनता के हाथ में होगी कमान

पूर्व आईएएस अधिकारी ने पार्टी के गठन के साथ ही प्रदेश की जनता के सामने तीन प्रमुख वचन रखे, जिन्हें वे अपनी पार्टी की नीतियों की रीढ़ मानती हैं:

1. पहला वचन: जनता की वास्तविक जरूरत के आधार पर बनेंगी नीतियां

दिव्या मित्तल ने कहा कि प्रशासनिक योजनाएं वातानुकूलित कमरों में बैठकर फाइलों के आधार पर नहीं, बल्कि धरातल पर रहने वाले किसान, छोटे व्यापारी, मजदूर और युवाओं की वास्तविक जरूरतों को पूछकर बनाई जाएंगी। उन्होंने मिर्जापुर के लहुरियादह गांव की देवकली देवी का जिक्र किया, जिन्होंने अपने घर में पानी की भीषण समस्या के बावजूद गांव के बच्चों के लिए स्कूल की मांग की थी। दिव्या ने सवाल उठाया कि जब बजट, नियम और जरूरत सब मौजूद हैं, तो ऐसे जरूरी काम वर्षों तक फाइलों और लालफीताशाही में क्यों लटके रहते हैं। उनकी पार्टी नीतियों के केंद्र में भविष्य की पीढ़ियों, पढ़ने वाले युवाओं और महिलाओं के सपनों को प्राथमिकता देगी।

2. दूसरा वचन: किसी के प्रभाव में नहीं, प्राथमिकता के आधार पर होंगे फैसले

विकास कार्यों में राजनीतिक रसूखदारों के दखल पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि अक्सर किसी एक ताकतवर व्यक्ति के कहने पर सड़क या पुल का नक्शा बदल दिया जाता है, जिससे सैकड़ों गरीब परिवारों का नुकसान होता है। जननीति भारत में कोई भी फैसला जाति, धर्म या बाहुबल देखकर नहीं, बल्कि स्थानीय जनता के सामूहिक हित को देखकर लिया जाएगा। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अंधेरे रास्तों पर स्ट्रीट लाइट, कैमरे और पुलिस गश्त का निर्धारण अधिकारियों के अनुमान पर नहीं, बल्कि उन रास्तों से रोज गुजरने वाली छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के फीडबैक के आधार पर तय होना चाहिए।

3. तीसरा वचन: सरकारी कामकाज और बजट का जनता को मिलेगा सीधा हिसाब

पारदर्शिता पर जोर देते हुए उन्होंने वादा किया कि सरकारी योजनाओं, स्वीकृत बजट और विकास कार्यों की पूरी जानकारी बिचौलियों के माध्यम से नहीं, बल्कि सीधे जनता के मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने स्कूलों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों और सड़कों की गुणवत्ता जांचने के लिए कलर-कोडिंग (लाल, पीला, हरा) व्यवस्था का सुझाव दिया, जिसमें जनता खुद अपने क्षेत्र के विकास कार्यों को रेटिंग देकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करेगी।

कॉर्पोरेट की नौकरी, यूपीएससी में सफलता और मिर्जापुर में पहचान

दिव्या मित्तल का अब तक का सफर बेहद प्रेरणादायी रहा है। हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली दिव्या ने देश के शीर्ष संस्थान आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने लंदन में जेपी मॉर्गन जैसी वैश्विक वित्तीय कंपनी में लाखों के पैकेज पर काम किया। हालांकि, देश सेवा के जज्बे के चलते उन्होंने नौकरी छोड़ दी और साल 2013 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बनीं। अपने करीब 13 साल के प्रशासनिक करियर में वे मिर्जापुर, संतकबीरनगर और देवरिया जैसे जनपदों में डीएम रहीं। मिर्जापुर में जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने पानी की कमी से जूझ रहे पठारी गांव लहुरियादह में आजादी के दशकों बाद नल से जल पहुंचाकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं।

मिर्जापुर सदर सीट से चुनावी शुरुआत की अटकलें तेज

आईएएस पद से इस्तीफा स्वीकार होने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वे किसी बड़े राजनीतिक दल जैसे भाजपा, सपा या राजा भैया की जनसत्ता दल लोकतांत्रिक में शामिल हो सकती हैं। हालांकि, अपनी खुद की पार्टी का गठन कर उन्होंने साफ कर दिया है कि वे किसी पारंपरिक व्यवस्था का हिस्सा बनने के बजाय अपना स्वतंत्र विकल्प खड़ा करेंगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिव्या मित्तल आगामी 2027 के चुनाव में मिर्जापुर सदर विधानसभा सीट से चुनावी अखाड़े में उतर सकती हैं, जहां उन्हें प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान आम जनता का व्यापक जनसमर्थन मिला था। अब देखना होगा कि नौकरशाही के अनुभव और जननीति के इस नए विजन के साथ वे उत्तर प्रदेश की जटिल चुनावी राजनीति में कितना बड़ा प्रभाव छोड़ पाती हैं।