यूपी बीजेपी ने घोषित किए महिला और अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष, जानिए किस जिले में किसे मिली कमान
उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी रणनीति को धार देने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा फेरबदल करते हुए महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं। किसान मोर्चा और अनुसूचित जाति (SC) मोर्चा के बाद अब भाजपा ने महिला मोर्चा और अनुसूचित जनजाति (ST) मोर्चा के जिलाध्यक्षों और महानगर अध्यक्षों के नामों का भी आधिकारिक ऐलान कर दिया है। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष और एसटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विद्या भूषण गोंड द्वारा जारी की गई इन सूचियों में क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक समीकरण और जमीनी कार्यकर्ताओं की सक्रियता का विशेष ध्यान रखा गया है। उत्तर प्रदेश में जनजातीय आबादी की बसावट सीमित जिलों में होने के कारण एसटी मोर्चा के अध्यक्ष फिलहाल काशी, गोरखपुर और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के चिन्हित जिलों में घोषित किए गए हैं, जबकि महिला मोर्चा की कमान प्रदेश भर के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों में सौंपी गई है।
एसटी मोर्चा: गोंड, कोल और खरवार समाज को प्रमुखता
अनुसूचित जनजाति मोर्चा की सूची में पार्टी ने पूर्वांचल और बुंदेलखंड के उन जिलों पर ध्यान केंद्रित किया है जहां जनजातीय समुदाय चुनावी समीकरणों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। एसटी मोर्चा में सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व गोंड बिरादरी को दिया गया है, साथ ही कोल, नट, गिहार, खरवार और सहारिया जैसी जातियों को भी संगठन में अग्रणी स्थान मिला है:
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गोरखपुर क्षेत्र: गोरखपुर महानगर की जिम्मेदारी विनोद कुमार गोंड को दी गई है, जबकि गोरखपुर जिले की कमान धर्मराज गोंड संभालेंगे। महाराजगंज में प्रदीप गोंड, कुशीनगर में मार्कण्डेय गोंड और देवरिया में सिद्धि विनायक गोंड को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। बस्ती में रामसूरत गोंड, सिद्धार्थनगर में रामू गोंड, संतकबीरनगर में आनंद गोंड, आजमगढ़ में नंदलाल गोंड, लालगंज में अनिल गोंड, मऊ में पप्पू गोंड और बलिया में चंदन गोंड को कमान सौंपी गई है।
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कानपुर व बुंदेलखंड क्षेत्र: कानपुर देहात में सुमित गिहार को अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा झांसी, ललितपुर, सोनभद्र और मिर्जापुर जैसे वनवासी व पठारी जिलों में कोल और सहारिया समाज के अनुभवी चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है।
महिला मोर्चा: आधी आबादी को साधने के लिए नए चेहरों पर दांव
भाजपा महिला मोर्चा की नई सूची में पार्टी ने उन समर्पित महिला कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाया है जो बूथ और मंडल स्तर पर संगठन को सक्रिय रखने में जुटी थीं। प्रयागराज, गोरखपुर और बस्ती मंडल सहित प्रमुख जिलों में महत्वपूर्ण नियुक्तियां की गई हैं:
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प्रयागराज व आसपास: प्रयागराज महानगर में रीता सिंह, प्रयागराज यमुनापार में आरती सिंह और प्रयागराज गंगापार में रूपम त्रिपाठी को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है।
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गोरखपुर व बस्ती मंडल: गोरखपुर महानगर में प्रीति शाही को महिला मोर्चा का नगर अध्यक्ष बनाया गया है। गोरखपुर जिले की जिम्मेदारी डॉ. पूजा सिंह कौशिक को सौंपी गई है। संतकबीरनगर में किरण प्रजापति और बस्ती जिले में वरिष्ठ कार्यकर्ता शैल त्रिपाठी को महिला मोर्चा का नया जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
जातिगत संतुलन और क्षेत्रीय समीकरणों की जुगलबंदी
पार्टी के इस संगठनात्मक विस्तार के पीछे साफ रणनीति नजर आ रही है। पूर्वांचल के आदिवासी बहुल इलाकों में जहां समाजवादी पार्टी और अन्य क्षेत्रीय दल सेंध लगाने की कोशिश कर रहे थे, वहां गोंड और खरवार समाज के नेताओं को संगठनात्मक पद देकर भाजपा ने अपने वोट बैंक को सुरक्षित करने का प्रयास किया है। वहीं दूसरी तरफ, केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं (जैसे उज्ज्वला, पीएम आवास और लखपति दीदी) के प्रचार-प्रसार और महिला मतदाताओं को बूथ तक लाने के लिए महिला मोर्चा की जिला इकाइयों को पूरी तरह सक्रिय किया जा रहा है।
नए पदाधिकारियों के सामने संगठन को मजबूत करने की चुनौती
भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने सभी नवनियुक्त जिलाध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से अपनी-अपनी जिला कार्यकारिणी गठित करने और आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। पार्टी के शीर्ष नेताओं का मानना है कि बूथ स्तर पर महिलाओं और वंचित वर्गों की मजबूत भागीदारी ही संगठन की असल ताकत है। नए पदाधिकारियों की घोषणा के बाद स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है और वे अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी के जनाधार को और मजबूत करने की तैयारियों में जुट गए हैं।