आसमान के बाद अब जमीन पर 'रोबोट आर्मी' उतारेगा यूक्रेन, रूस के खिलाफ युद्ध में सैनिकों की जगह मोर्चा संभालेंगी घातक मशीनें
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे खूनी संघर्ष में आधुनिक युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है। आसमान में ड्रोनों के घातक हमलों के बाद अब यूक्रेन जमीन पर सीधी लड़ाई के लिए मशीनों और रोबोटिक हथियारों की एक पूरी फौज खड़ी करने की तैयारी में जुट गया है। यूक्रेन ने आधिकारिक तौर पर 'आर्मी ऑफ रोबोट्स' (Army of Robots) नाम से एक व्यापक डिफेंस-टेक पहल का ऐलान किया है। इसका मुख्य मकसद अग्रिम मोर्चे (फ्रंटलाइन) पर यूक्रेनी सैनिकों की जान बचाना और सबसे जोखिम भरे ऑपरेशनों में इंसानों की जगह रिमोट-नियंत्रित व स्वायत्त (ऑटोनॉमस) मशीनों को तैनात करना है।
'आर्मी ऑफ रोबोट्स': हवा से जमीन पर उतरा युद्ध का नया चक्रव्यूह
यूक्रेन के पूर्व रक्षा व डिजिटल मंत्री मायखाइलो फेडोरोव ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा करते हुए इसे किसी एक कंपनी का प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक पूरा सैन्य-तकनीकी इकोसिस्टम बताया है। साल 2022 में शुरू किए गए सफल 'आर्मी ऑफ ड्रोन्स' प्रोजेक्ट की तर्ज पर अब यूक्रेन ने जमीन पर अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल्स (UGVs) और कॉम्बैट रोबोट्स का जाल बिछाना शुरू कर दिया है।
इस पहल के तहत यूक्रेन डिफेंस-टेक कंपनियों में सीधा निवेश करेगा और रोबोटिक्स इंजीनियरों को फ्रंटलाइन के अनुकूल हथियार तैयार करने के लिए जोड़ेगा। फेडोरोव ने स्पष्ट किया कि रोबोट्स का काम घायल सैनिकों को रेस्क्यू करना, गोला-बारूद पहुंचाना, बारूदी सुरंगें बिछाना और हटाना (माइनिंग और डी-माइनिंग), दुश्मन के ठिकानों की टोह लेना और सीधे हमले करना होगा।
भारी ड्रोनों से रूसी सीमा के 10 किमी अंदर गिराए गए 'कामिकेजे रोबोट'
यूक्रेन ने हाल ही में युद्ध के मैदान में इस रोबोटिक तकनीक का एक बेहद हैरान करने वाला प्रयोग किया है। डोनेट्स्क के उत्तरी मोर्चे पर 'ऑपरेशन विवाल्डी' के दौरान यूक्रेनी सेना की तीसरी असॉल्ट ब्रिगेड ने पहली बार भारी बमवर्षक ड्रोनों (ग्रिफॉन) के जरिए सुसाइड ग्राउंड रोबोट्स को रूसी मोर्चे के 10 से 15 किलोमीटर पीछे एयरड्रॉप किया।
हवा से पैराशूट या ड्रॉप मैकेनिज्म के जरिए जमीन पर उतरे इन रोबोट्स ने रूसी ठिकानों और आराम कर रहे सैनिकों के बंकरों को विस्फोटकों से उड़ा दिया। यूक्रेनी कमांडरों का दावा है कि इस तरह ड्रोन से जमीनी रोबोट गिराने की तकनीक दुनिया में पहली बार इस्तेमाल हुई है। इन रोबोट्स पर मशीन गन लगाकर उन्हें कई हफ्तों तक एक ही पोजिशन पर निगरानी और फायरिंग के लिए भी तैनात किया जा रहा है।
ह्युमनॉइड रोबोट्स की तैयारी और मानव नुकसान कम करने की रणनीति
यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अकेले अगस्त 2026 में 25,000 से अधिक लॉजिस्टिक्स और रेस्क्यू मिशन ग्राउंड रोबोट्स के जरिए पूरे किए गए हैं, जबकि इस साल अब तक 22,000 से अधिक यूजीवीस (UGVs) के अनुबंध दिए जा चुके हैं। इस योजना का अगला बड़ा लक्ष्य खाइयों (ट्रेंच वॉरफेयर) में ह्युमनॉइड (मानवाकार) रोबोट्स को उतारना है, ताकि आमने-सामने की गोलीबारी में सैनिकों को सीधे खतरे में न डालना पड़े।
सैनिकों की घटती संख्या और भारी गोला-बारी के बीच यूक्रेन का यह नया 'रोबोटिक दांव' आने वाले महीनों में रूस के खिलाफ युद्ध की रणनीति को एक बिल्कुल नए और अप्रत्याशित दौर में धकेल सकता है।